Shri Kshetra Arhantgiri, Arihantgiri, Tirumalay

Shri Karnde Darshan Shri Kisath Mangalam Darshan
Shri Melsithamur Darshan Shri Perambur Darshan
Shri Ponnur Hills Darshan Shri Tirupalnmoor Darshan
Shri Uppuvelur Darshan Shri Valathi Darshan
Venkundram Darshan

name

name8

name3

यह अतिशय छेत्र, तिरुव्नामिले जिला, पोलूर तहसील में स्थित हें, बेगलूर - वेलूर से पोलूर मार्ग में केलूर हें । यहाँ से ७ कि. मी. तिरुमले हें । या तिरुव्नामले - पोलूर से आरणी मार्ग में वडमादी मगल सर्कल हें । यहाँ से ६ कि.मी. की दूरी पर तिरुमले स्थित हें ।


चेन्नई से - आरकोट (एन. एच. 4) - आरणी से १५ कि. मी. वडमादी मगल सर्कल हे | यहाँ से ६ कि. मी. दूर तिरुमले हे | यह स्थान आचाय की साधना - समाधीस्थली हे | शिलालेखो में इस पहाड़ के अनेक नाम मिलते हे | आरिहन्सुगीरि , आरिहन्सुगीरि मले , तिरुमले , श्रीशैल, तिस्मले आदि यहाँ पर एक छोटा पहाड़ के तलहटी में 'जिनालय ' हे | यह जिनालय ३ भाग में विभाजित हे | जिनालय चोलवंशी राजाओ के समय का हे, जिसे राजराजा की बड़ी बहन 'कुन्देवे' ने १०वी सदी में निमित कराया ; नदकीअप ------------ मन्दिर का नाम 'कुन्दाबाई जिनालय' हे | मन्दिर में वर्धमान स्वामी की मूर्ति हे , इस पर गोपुरम हे | इसके बाद विशाल भगवान नेमिनाथ जिनालय आत्ता हे | मद्य के जिनालय में भगवान नेमिनाथ स्वामी की मूर्ति हे | इसमें श्री आदिनाथ, अनन्तनाथ, श्री पश्व्रनाथ, श्री नन्दीश्वर, श्री नवदेवता, ---------- -- धर्म- देवीयाशी, सरवस्ती, -------- ब्रम्हादेव अद्दी पर्तिमाए हे | दाहिने तरफ पहाड़ को काटकर गुफा मन्दिर बनाये गये हे | यहाँ पर १००८ श्री चंद्रप्रभु जिनालय हे | अन्य एक शिला पर मूर्तिया उत्क्रींण हे |


गुफा की दीवार में श्री कुश्मधिनी देवी, श्री बाहुबली भगवान पार्श्वनाथ स्वामी की पर्तिमा उत्क्रींण हे | यहाँ पर गुफ़ा में उपर चदकर ३ कमरे बने हे | वहा पर प्राचीन कालानुसार चित्रकार बनी हे | चित्र ------भिन हे | यहाँ पर नवदेवता बिम्ब हे | इस मन्दिर के ऊपर गोपुरम बना हे | इस गुफ़ा में मुनियों का निवास- स्थान रहा होगा | यह शान्त एव रम्य स्थान हे |


name3

इन गुफाओं में गघाचितामणि के रचयिता ताक्रिक श्री वादीभसिह जी की साधना एव समाधिस्थल हे | इसी गुफ़ा में आचाय अकलंक स्वामी ने साधना , साहित्य- सुजन करते हुए अनेक शिशो को विद्याभ्यास कराते हुए यहाँ गुरुकुल की नीव रखी | इसके अलावा यहाँ बड़ी-बड़ी प्राकुर्तीक गुफाए भी हे | जिसमे १००-२०० मुनिगण एक साथ साधना करते थे | यह पाषण - निमित हे |


इसके बाद छोटे से पहाड़ पर १०० सीढिया चढने के बाद, १८ फीट उची भगवान नेमिनाथस्वामी की खडगासन पतिमा शैलोक्रींण हे | यह पतिमा १८०० वर्ष प्राचीन हे | जो तमिलनाडु की सबसे ऊची मूर्ति हे | स्थानीय नीवसी नेमी नाथ भगवान की मूर्ति को 'शिखामणि नायर' नाम से पुकारते हे | मन्दिर के बगल में एक झरना हे | यहाँ का जल कभी नहीं सूखता, और शीतल भी हे | जो अभिषेक के काम में आता हे | कुछ उपर चढकर एक विशाल चटान पर ३ चरण पादुकाए हे, जो कि श्री वूषभाचाय, श्री समन्तभद्राचाय और वरदत गणधर महाराज कि हे | इन चरणपादुकाओ को सुरशित रखने हेतु जाली का प्रबन्ध करने कि एव नाम लिखकर सुरशित करने कि आवश्कता हे | यहाँ पाण्ड्वो ने विहार किया था | यह अतिप्राचीन चतुथकालीन अतिशय शेत्र हे |


name5

१९९८ के बाद तलहटी में एक कि स्थापना की गयी हे | श्रवणबेलगोला के परमपूज्य जगदगुरु कर्मयोगी स्व--- श्री चारूक्रितिजी भटारक् स्वमीजी ने स्व--- श्री आशीर्वाद से एव मंगल -प्रेरणा से मठ की व्यवस्था हो रही हे .

  • Online Shopping Portal, USB Fancy Pen Drives, USB Peb Drives, Britannica Products and Many More....

  • www.DhamaalDeals.com