| Bhaktamar Stotra | ||||||||||
| According to legends that are given in several texts, the Jain monk Mantunga was chained and imprisoned by the local King Vriddha Bhoj. Mantunga composed his stotra in the prison. With the completion of each verse, a chain broke, (A door opened). Manatunga was free when all the verses were finished. | ||||||||||
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| आदिदेव भगवान ऋषभदेव के चरण-युगल में भक्तिपूर्वक नमस्कार करते हुए देवताओं के मुकुट में जड़ी मणियाँ प्रभु के चरणों की दिव्य कान्ति से और अधिक चमकने लगती हैं। भगवान के उन पवित्र चरणों का स्पर्श ही प्राणियों के पापों का नाश करने वाला है, तथा जो उनके चरण-युगल का आलम्बन (सहारा) लेता है, वह संसार-समुद्र से पार हो जाता है। इस युग के प्रारम्भ में धर्म का प्रवर्तन करने वाले प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव के चरण-युगल में विधिवत् प्रणाम करके मैं स्तुति करता हूँ। | ||||||||||
| यः संस्तुतः सकल-वाङ्मय तत्त्वबोधा- दुद्भूत-बुद्धि-पटुभिः सुरलोक-नाथैः । स्तोत्रैर् जगत्त्रितय-चित्तहरैरुदारैः स्तोष्ये किलाहमपि तं प्रथमं जिनेन्द्रम् ।।२।। |
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| भगवान आदिनाथ के दिव्य चरणों में देवगण भक्तिपूर्वक नमस्कार कर रहे हैं, प्रभु के नखों से दिव्य किरणें निकल रही हैं। जिन्होंने भगवान के चरणों का आलम्बन (शरण) लिया, वे संसार-सागर को पार कर रहे हैं, जो इन चरणों से दूर रहे, वे संसार-समुद्र में डूबते जा रहे हैं।सम्पूर्ण शास्त्रों का ज्ञान प्राप्त करने से जिनकी बुद्धि अत्यन्त प्रखर हो गई है, ऐसे देवेन्द्रों ने तीन लोक के चित्त को आनन्दित करने वाले सुन्दर स्तोत्रों द्वारा भगवान आदिनाथ की स्तुति की है। उन प्रथम आदि-जिनेन्द्र की मैं अल्पबुद्धि वाला मानतुंग आचार्य भी स्तुति करने का प्रयत्न कर रहा हूँ। | ||||||||||
| बुद्ध्या विनाऽपि विबुधार्चित-पादपीठ! स्तोतुं समुद्यत-मतिर् विगत-त्रपोऽहम् । बालं विहाय जल-संस्थितमिन्दु-बिम्ब- मन्यः क इच्छति जनः सहसा ग्रहीतुम् ।।३।। |
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| प्रखर बुद्धिमान् देवेन्द्र भगवान आदिनाथ की स्तुति कर रहे हैं, उनके समक्ष अति अल्पबुद्धि वाला भक्त भी स्तुति करने का प्रयास कर रहा है।हे देवों द्वारा पूजित जिनेश्वर! जिस प्रकार जल में झलकते चन्द्रमा के प्रतिबिम्ब को पकड़ना असंभव होते हुए भी, नासमझ बालक उसे पकड़ने का प्रयास करता है, उसी प्रकार मैं अत्यन्त अल्पबुद्धि होते हुए भी आप जैसे महामहिम की स्तुति करने का प्रयास कर रहा हूँ। | ||||||||||


